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कांग्रेस का मुकाबला कांग्रेस से Featured

सत्ता से पहले सत्ता की लड़ाई कांग्रेस में नजर आ रही है। कांग्रेस अगर यह मानकर चल रही है कि सत्ता खुद चलकर उनके पास आ रही है, तो उन्हें इस गलतफहमी को त्याग देना चाहिए। प्रदेश में भाजपा की जड़े इतनी मजबूत है कि वो किसी एक नेता के खराब प्रदर्शन के बाद भी अपनी वापसी करने में अब अक्षम नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को आपसी मनमुटाव छोड़कर अपनी नीति और रीति को संभालना होगा।

पिछले दिनों राजनीतिक दृष्टि से कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। संयोग है कि दोनों ही घटनाक्रम कांग्रेस के थे और आपसी फूट से जुड़े थे। यह साबित हो गया कि जनता ने कांग्रेस को सत्ता देने का मानस बनाया है या नहीं बनाया है, यह भविष्य के गर्त में है लेकिन स्वयं कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया है कि उनकी सरकार आ रही है। पार्टी में जीत का कोई सवाल नहीं है, मुद्दा तो सिर्फ मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इसका है। यही कारण है कि हाल ही में जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीकानेर आए तो कांग्रेस के मुख्यमंत्री का मुद्दा खड़ा हो गया। पहले उन्होंने सीकर में जो कुछ कहा, वो खबर का हिस्सा बना और बाद में उनकी उपस्थिति में रामेश्वर डूडी जिंदाबाद के नारे चर्चा का केंद्र बने। दरअसल, कांग्रेस में इन दिनों तीन नेता मुख्यमंत्री पद के दावेदार है। पहले स्वयं अशोक गहलोत, दूसरे प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और तीसरे नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी। ऐसे में डूडी समर्थक पूरे जोश के साथ जिंदाबाद के नारे लगाने से नहीं चूक रहे थे। लोकतंत्र में इस तरह की स्वतंत्रता हर किसी को है लेकिन चुनाव से दस महीने पहले इसे जल्दबाजी कहा जाएगा। पार्टी को अभी अपनी जीत सुनिश्चित करनी है, जिसके लिए माहौल बनता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
दूसरा मामला था खाजूवाला का। यहां भी कांग्रेस खुद से उलझती नजर आई। एक तरफ तो कांग्रेस के देहात अध्यक्ष महेंद्र गहलोत प्रदर्शन में जुटे थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता गोविन्द मेघवाल। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी फूट चुनाव से पहले ही स्पष्ट कर दी। देहात अध्यक्ष महेंद्र गहलोत ने जिस तरह का प्रदर्शन यहां किया है, उससे साफ है कि वो व्यक्तिगत राजनीति में विश्वास रखते हैं।


पत्रबाजी का सिलसिला शुरू हुआ

कांग्रेस के अंदरुनी कलह का ही नमूना है कि पार्टी के नेता अपने ही पदाधिकारियों के खिलाफ जमकर पत्रबाजी कर रहे हैं। खासकर खाजूवाला मामले के बाद देहात अध्यक्ष महेंद्र गहलोत को घेरने की तैयारी पूरी हो रही है। एक ही दिन में दो आयोजन से पहले भी गहलोत के खिलाफ प्रदेशाध्यक्ष को पत्र लिखा गया था और नए सिरे से फिर गहलोत की शिकायत की जा रही है। इस बार प्रदेश अध्यक्ष के साथ नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक बात पहुंचाने का प्रयास हो रहा है कि यहां पार्टी को अपने ही पदाधिकारियों से नुकसान हो रहा है। यह बात अलग है कि गहलोत भी पूरी तैयारी करके मैदान में है।


क्रिकेट के बहाने राजनीति

क्रिकेट के बहाने राजनीति उच्च स्तर पर तो होती रही है लेकिन जिला स्तर पर ऐसा मामला पहली बार ही सामने आया है। पिछले दिनों पुष्करणा स्टेडियम पर आयोजित एक क्रिकेट प्रतियोगिता के शानदार आयोजन के बाद एक नेताजी ने मंच पर खड़े होकर जमकर भाषण दिए। अपनी जाति के लिए काफी जोश और खरोश के साथ बात रखी। अच्छी बात है। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताना था कि वो इस मैदान के लिए क्या कर रहे हैं। दुखद बात है कि बीकानेर पश्चिम विधानसभा में एक भी ऐसा खेल मैदान नहीं है जहां खिलाड़ी पूरे विश्वास के साथ अपना समय दे सकें। पुष्करणा स्टेडियम में ुसुविधा नहीं है, एमएम ग्राऊंड में जगह नहीं है। धरणीधर मैदान में कुछ कोशिश हो रही है लेकिन इंडोर गेम वाले खिलाड़ी को मन मसोसना ही पड़ेगा।

गहलोत की राजनीति

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार साबित कर गए कि बीकानेर के बड़े राजनेताओं के बावजूद उनकी फेन फॉलोविंग यहां कम नहीं है। उन्होंने 'अपनोंÓ से जुडऩे का कोई मौका नहीं छोड़ा। वो यहां अपने मित्र भवानीशंकर शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त करने आए थे लेकिन आ ही गए तो कई अन्य काम भी निपटा गए। रिश्तेदार रवि गहलोत के निधन पर शोक जताया तो पुराने समय के मित्र प्रोफेसर अशोक आचार्य के घर पहुंचकर उनके पुत्र संजय आचार्य से भी मिले। इतना ही नहीं गहलोत बाद में कांग्रेस नेता और माली समाज के प्रदेशाध्यक्ष गुलाब गहलोत के घर भी पहुंचे। गुलाब अशोक गहलोत के नजदीकी रहे हैं। दरअसल, गहलोत ने जिले के बड़े कांग्रेसी नेताओं को बता दिया कि उनके क्षेत्र में भी वो वजूद रखते हैं।

DNR Reporter

DNR desk

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