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कांग्रेस का यह कैसा डीएनए Featured

न सिर्फ गाय बल्कि गौ के पूरे वंश यानी गौ वंश की रक्षा के लिए अचानक से कांग्रेसी चिंतित हो गए हैं। राहुल गांधी एक बात बार बार बताते हैं कि कांग्रेस के डीएनए में क्या-क्या है। इतना निश्चित है कि यह गाय कभी कांग्रेस के डीएनए में नहीं थी। इसके बाद भी उनकी पार्टी के बैनर तले इस तरह हिन्दूवादी नीति रीति की न सिर्फ बातें बल्कि उनकी आस्था से जुड़े मुद्दों की बात भी हो रही है, तथाकथित चिंता हो रही है और इसी चिंता का जमकर जिक्र हो रहा है। कांग्रेस के डीएनए में नहीं होते हुए भी ऐसा क्यों हो रहा है, इसका जवाब 'कींकरिया क्लबÓ के एक साथी ने दे दिया। उन्होंने कहा कि गोपाल गहलोत के डीएनए में गाय और हिन्दूवादी राजनीति थी। वो कांग्रेस में आकर भी वैसा ही कर रहे हैं। एक दूसरे नेता जो कांग्रेस से भाजपा में चले गए हैं, वो आज भी कांग्रेसी स्टाइल में ही राजनीति कर रहे हैं। बताते हैं कि पिछले दिनों वो खुद यह स्वीकार कर चुके हैं कि वो कांग्रेसी स्टाइल में ही राजनीति कर सकते हैं। 

दरअसल, कांग्रेस और भाजपा के जिन नेताओं ने पिछले चुनाव में पार्टी बदली थी, उनमें अधिकांश का अपनी मूल पार्टी में ही मन लगता है। एक नेताजी अब कांग्रेस में आ गए हैं लेकिन साथी और 'चेलेÓ अब भी भाजपा में ही है। ऐसे में वो स्वयं कांग्रेस में रहकर भाजपा के अपने मित्रों को अब तक संभाले हुए हैं। भाजपा के युवा नेताओं का समर्पण इन नेताजी के प्रति इतना जबर्दस्त है कि वो चाहकर भी उन्हें छोड़ नहीं पाते। अच्छी बात है। राजनीति किसी पार्टी की सीमाओं में बंधकर नहीं की जा सकती। प्रतिबद्धता एक पार्टी के प्रति हो सकती है लेकिन मित्रता सभी के साथ होनी चाहिए। बीकानेर में दो पार्टियों के बीच ऐसी मित्रता देखकर मन को सुकून मिलता है।


फिर से कर्मचारी नेता सक्रिय है


विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही कर्मचारी नेता फिर सक्रिय हो गए हैं। विभिन्न विभागों की राजनीति कर रहे कर्मचारी नेता जैसे ही चुनाव आते हैं अपनी राग तेज कर देते हैं। उनके साथ वाले भी समझ जाते हैं कि इन्हें चुनाव लडऩा है, वो ही उन्हें पीछे धकेलना शुरू कर देते हैं। दो कर्मचारी नेता इस बार भी टिकट की कोशिश में है। एक नेताजी बीकानेर में राजनीति करते हैं और दूसरे जयपुर में। दूसरे वाले नेताजी कभी कभार ही जयपुर से बीकानेर आते हैं। वो सत्ता के नजदीक है लेकिन सत्ता का हिस्सा अब तक नहीं बन पाए। पिछले दो विधानसभा चुनाव में उनका नाम आता है, टिकट नहीं आता।


बेनीवाल बिगाड़ रहे हैं फिल्डिंग

हनुमान बेनीवाल ने प्रदेश की राजनीति में अड़ंगा डाला है तो बीकानेर में भी उनसे कई बड़े नेता अब परेशान हो रहे हैं। लाखों युवाओं की मीटिंग करने वाले राजस्थान के इक्का दुक्का नेताओं में से एक हनुमान बेनीवाल ने जैसे ही बीकानेर में हुकार रैली करने की घोषणा की, वैसे ही कई नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरे नजर आने लगी है। दरअसल, बेनीवाल अगर यहां मजबूत होते हैं तो कई विधानसभा सीटों पर असर डाल सकते हैं। उनसे सर्वाधिक कांग्रेस प्रभावित होगी। नोखा, श्रीडूंगरगढ़ और लूणकरनसर सीटों पर बेनीवाल की प्रभावी उपस्थिति रहती है तो इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को जाने वाला है। दरअसल, कांग्रेस विचारधारा के किसान मतों का बंटवारा ही बेनीवाल करेंगे। पिछले दिनों पत्रकार सम्मेलन में उनसे यह सीधा सवाल पूछा तो वो हंसी मजाक में टाल गए।

जिसा छोड़ग्या, बिसा ही हां

पद के साथ व्यक्ति की विचारधारा बदल जाती है। व्यस्तता भी बढ़ जाती है। इसी विचारधारा और व्यस्तता के बीच कई बार अपने पराए होने लगते हैं। अब तक जो लोग हमारे आगे पीछे दौड़ रहे थे, वो ही लोग बोझ लगने लगते हैं। उन्हें जरा से टेढ़ा बोला नहीं कि वो किनारे हो जाते हैं। न सिर्फ किनारा करते हैं बल्कि विरोधी उसे तुरंत अपने साथ जोड़ भी लेते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के एक कद्दावर नेता को कुछ ऐसा ही अहसास हुआ। इनके पास सत्ता नहीं होने के बावजूद दबदबा होने के कारण स्वभाव में अंतर देखा गया। एक युवा नेता उनसे नाराज हो गए। जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की उपस्थिति में इस बड़े नेता ने अपने युवा नेता से कुशलक्षेम पूछी तो युवा नेता ने यह कहकर किन्नी काट ली..'जिसा थे छोड़ग्या हा, बिसा ही हांÓ

DNR Reporter

DNR desk

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