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कसमसाहट, इधर भी-उधर भी Featured

जिले के एक बड़े नेता भाजपा में वापस आ रहे हैं। इस आशय की खबर चर्चा में आई तो इधर और उधर दोनों तरफ कसमसाहट चालू हो गई। नेताजी की अभी वाली पार्टी के नेता तो यह सोचकर खुश थे कि अगले चुनाव में एक दावेदार कम हो जाएगा, उधर वाले इसलिए खुश थे कि उनके बिना कुछ युवा नेताओं का मन है कि लगता नहीं। हालांकि कुछ बड़े नेताओं के पेट में दर्द भी होने लगा कि यह फिर आ गए तो हमारा क्या होगा? राजनीति में दोस्त कभी दोस्त नहीं होता और दुश्मन हमेशा के लिए दुश्मन नहीं होता। अब यह खबर आई तो पुष्टि के लिए हमने इधर-उधर झांकने के बजाय सीधे नेताजी को ही फोन लगा दिया। उनका जवाब इतना जबर्दस्त था कि 'मेरी किस्मत में विपक्ष ही थोड़े लिखा है?Ó बात भी सही है जिस जहाज में सवार हो, वो किनारे पहुंच रहा है तो डूबने वाले जहाज में सवार क्यों हो? हालांकि यह भविष्य के गर्त में है कि जहाज डूबेगा या नहीं? पिछले दिनों जहाज में पानी आने की बात पता चली। १७ छेद तो पूरी तरह से सामने आ गए, बाकी का पता लगाया जा रहा है। ऐसे में नेताजी के इस कथन को समझदारी भरा निर्णय कहना ही पड़ेगा। यह भी कह सकते हैं कि बार बार गलती नहीं होती।

अब उधर, बैठे एक नेताजी घर वापस आने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। वो मान गए कि उनका मन इधर लगता ही नहीं। वो डेढ़ सौ से ज्यादा छेद वाला जहाज छोड़कर दौड़ते जहाज में चढ़े थे लेकिन उन्हें मनपसंद जगह नहीं मिल पाई। जो जहाज डूबा था, उसमें वो आगे की सीट पर थे लेकिन अब बहुत पीछे की सीट नसीब हो पा रही है। यह भी चाहते हैं कि एक बार सत्तासीन जहाज पर ही सवारी की जाए। पुराने रसूख काम आने ही चाहिए।

युवाओं पर रहेगी नजर

अब हर काम चुनावी है। बड़े नेता तो अपने स्तर पर चुनावी तैयारियों में जुट भी गए हैं। बूथ स्तर पर कामकाज शुरू हो गया है। मतदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि इसी का परिणाम है। लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में तीस से चालीस हजार के बीच नए मतदाता है। यह सभी मतदाता १८ वर्ष से २२ वर्ष की आयु के हैं, जिन्हें संभवत: पहली बार मतदान करने का अधिकार मिलेगा। ऐसे में इन युवाओं को ध्यान में रखकर ही बड़े नेता अपनी योजनाएं बना रहे हैं। कार्यक्रमों में उपस्थिति की बात हो या फिर अपने व्यक्तिगत आयोजन हो, हर कहीं युवा शक्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चुनाव में जरूरी भी है।

एक गैर राजनीतिक अच्छा प्रयास

चुनावी दौर में हर काम चुनावी होता है लेकिन शहर की एक कॉलोनी ने राजनीति को किनारे रखकर अपना मंच बना लिया है। मुरलीधर व्यास कॉलोनी के युवाओं के प्रयास से यहां व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सभी लोगों को जोडऩे का प्रयास किया गया। व्हाट्सएप से बाहर निकलकर ग्रुप के सदस्यों ने पिछले दिनों 'फेस टू फेसÓ मुलाकात की। इसके बाद ही एक 'गेट टू गेदरÓ रखा गया है। कुछ ही दिनों में सभी सदस्य मिलेंगे। अच्छी बात है कि गैर राजनीतिक रूप से एक समूह अपने क्षेत्र के विकास की बात कर रहा है। पूरी तरह से उपेक्षित इस कॉलोनी के लोगों को इस एकजुटता का परिणाम भी मिलेगा। जिन लोगों को यहां राजनीति करने का शौक है, उन्हें भी संयम बरतना होगा। कई बार अच्छे काम कुछ लोगों के कारण बिगड़ जाते हैं, सब मिलकर सकारात्मक सोच रखेंगे तो विकास भी होगा।

बीकानेर पूर्व से कौन?

बीकानेर पूर्व विधानसभा सीट से इस बार कौन कौन दावेदार होगा? यह सवाल इन दिनों चर्चा में है। हालांकि सोशल मीडिया पर पूर्व के बजाय पश्चिम पर ज्यादा चर्चा होती है लेकिन पूर्व से कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर कयास का दौर तेज हो गया है। जो भी राजनीति में थोड़ा बहुत सक्रिय होने की कोशिश करता है, वो ही पूर्व का दावेदार घोषित हो जाता है। दरअसल, बीकानेर पूर्व एक ऐसी सीट है, जहां जातीय और धार्मिक राजनीति संभव नहीं है। वहां सभी जातियों के लोग हैं, सभी आर्थिक तबके के लोग हैं। ऐसे में कांग्रेस को भी ऐसे नेता की जरूरत है जो पूर्व राजपरिवार की सदस्या और दो बार की विधायक सिद्धि कुमारी को टक्कर दे सके। मामला इतना आसान नहीं है, जितना कांग्रेस के नेता समझ रहे हैं।

DNR Reporter

DNR desk

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