भारत का चुनाव दुनिया के सबसे खर्चीले चुनावों में से एक होगा?

नई दिल्ली
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में होने वाले आम चुनाव को सबसे महंगे चुनावों में से एक माना जा रहा है। 11 अप्रैल से शुरू होकर लोकसभा चुनाव 6 हफ्ते तक चलेगा और 19 मई को पूरा होगा। 23 मई को नतीजे आ जाएंगे। नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (CMS) के अनुसार इस बार चुनाव प्रक्रिया में अभूतपूर्व तरीके से 500 अरब रुपये (7 अरब डॉलर) खर्च होंगे। अमेरिकी राजनीति में पैसे का हिसाब-किताब रखने वाली OpenSecrets.org के अनुसार 2016 के चुनाव में 6.5 अरब डॉलर खर्च हुए थे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। CMS के आकलन पर गौर करें तो यह 2014 में संसदीय चुनावों के दौरान हुए खर्चे 5 अरब डॉलर से 40 फीसदी ज्यादा है। इतना ही नहीं, एक ऐसे देश में जहां 60 फीसदी आबादी 3 डॉलर प्रतिदिन पर जीवन-यापन करती है यह खर्च प्रति वोटर तकरीबन 8 डॉलर बैठता है। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के चेयरमैन एन. भास्कर राव ने कहा, ‘खर्च में ज्यादातर बढ़ोतरी सोशल मीडिया के इस्तेमाल, यात्रा और विज्ञापन पर होगी।’

‘सोशल मीडिया खर्चे में काफी बढ़ोतरी’
राव ने कहा कि 2014 की तुलना में सोशल मीडिया पर खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पिछली बार के 2.5 अरब रुपये के खर्च से बढ़कर इस बार सोशल मीडिया पर खर्च 50 अरब रुपये हो सकता है। राव के मार्केट रिसर्च ग्रुप का प्रोजेक्शन फील्ड इंटरव्यूज, सरकारी आंकड़े और दूसरे रिसर्च पर केंद्रित रहता है। अनुमान के मुताबिक इस बार हेलिकॉप्टरों, बसों और उम्मीदवारों व पार्टी वर्करों की यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साधनों में काफी बढ़ोतरी होगी।

भारत में चुनावों की जानकारी रखने वाले कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साइमन चाचर्ड ने कहा कि स्पेसिफ़िक डेटा मिलना मुश्किल है लेकिन सामान्य रूप से खर्चे बढ़ गए हैं क्योंकि चुनाव क्षेत्र बढ़ा है और उम्मीदवारों की तादाद भी। उनका कहना है कि भारतीय राजनेता महसूस करते हैं कि उन्हें चुनावों में नई चीजें, दिलचस्प चीजें, बड़ी चीजें और जोरदार चीजें करनी होंगी। चाचर्ड ने कहा, ‘केवल उम्मीदवार ही पैसे खर्च नहीं करते हैं बल्कि कई तरह की चीजें बेचने वाले वेंडर्स भी चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाली चीजें बाजार में उतारते हैं।’

आइए समझते हैं कि चुनाव में कैसे कहां खर्च हो सकता है-

पैसा ही नहीं बकरी का भी गिफ्ट
543 सीटों के लिए 8,000 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं और ऐसे में जीत हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। उधर, सीक्रेट बैलट से यह साफ है कि घूस देने के बाद भी इसकी गारंटी नहीं है कि वोट मिला ही हो। चाचर्ड के अनुसार गिफ्ट मिलने से भारत के वोटरों को यह अहसास जरूर होगा कि उम्मीदवार काफी प्रभावी और अमीर है।

एक सर्वे के अनुसार ज्यादातर भारतीय नेताओं का कहना है कि उनके साथ के लोग कैश, शराब और दूसरे निजी सामानों के गिफ्ट से दबाव महसूस करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के सहायक प्रफेसर जेनिफर बशेल के सर्वे के अनुसार कुछ इलाकों में तो ब्लेंडर्स, टीवी सेट्स और कभी कभार बकरियों को गिफ्ट के तौर पर बांटा जाता है। पिछले साल कर्नाटक में हुए चुनाव में चुनाव आयोग ने 1.3 अरब रुपये से ज्यादा का कैश, सोना, शराब और ड्रग्स जब्त किया था।

ज्यादातर खर्चे को सार्वजनिक तौर पर दिखाया नहीं जाता है। हालांकि कैंडिडेट्स को कानूनी तौर पर एक सीमा के भीतर खर्च करना होता है लेकिन पार्टियां जबरदस्त पैसा चुनाव में झोंक देती हैं।

चिकन करी भी खिलानी है
भारतीय नेता रैली जबरदस्त करना चाहते हैं। वे एक छोर से दूसरे छोर जाकर रैली करते हैं। बड़े-बड़े टेंटों में लोगों को जुटाया जाता है। ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने के लिए कुछ नेता खाने का डिब्बा भी देते हैं जिसमें बिरयानी और चिकन करी परोसी जाती है जो काफी खर्चीली साबित होती है। इसके अलावा पटाखे, कुर्सियां, माइक्रोफोन्स, सुरक्षा और गाड़ियों के रेले का खर्च अलग ही है।

डमी कैंडिडेट्स
चुनाव आयोग डमी कैंडिडेट्स को लेकर पहले ही आगाह कर चुका है। दरअसल, मजबूत उम्मीदवार के नाम के लोगों को चुनाव में खड़ा कर पार्टियां जनता को भ्रम में डालकर वोट काटने की रणनीति अपनाती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस तरह की ट्रिक काफी काम करती है। लोकप्रिय चेहरे भी इससे अछूते नहीं होते हैं। 2014 के चुनाव में जानी मानी अभिनेत्री हेमा मालिनी के खिलाफ दो और हेमा मालिनी खड़ी हो गईं थीं। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डमी कैंडिडेट्स खड़े करने में काफी पैसा खर्च होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसमें करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं।

जेनिथ इंडिया के मुताबिक आने वाले चुनावों में विज्ञापनों पर 26 अरब रुपये से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। इससे पहले 2014 के चुनाव में चुनाव आयोग के अनुमान के मुताबिक दोनों प्रमुख पार्टियों ने 12 अरब रुपये खर्च किए थे, ऐसे में इस बार यह राशि दोगुनी हो सकती है। कंपनी की रिपोर्ट बताती है कि अकेले फरवरी में केवल फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों पर 4 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इसके अलावा ‘नमो अगेन’ के स्लोगन की तरह टी-शर्ट्स भी आ गए हैं।

उधर, भारत के बजट में इस वित्त वर्ष में चुनाव आयोग के लिए 2.62 अरब रुपये आवंटित किए गए हैं, जो रेकॉर्ड है। इसमें कुछ पैसे हाथियों पर खर्च होंगे, जिससे सुदूर इलाकों तक EVM मशीनें पहुंचाई जाएंगी और नाव के जरिए लोगों व सामानों को ब्रह्मपुत्र नदी पार कराई जाएगी।

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